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Continue reading →: उपन्यास में गद्य की प्रधानता और उसकी भूमिका
आधुनिक काल के विभिन्न देनों में से एक, उपन्यास विधा समय के साथ अपने विकास के चरम स्तरों पर जा पहुँची है। उपन्यास जीवन की समग्रता को अपने अंदर समाहित करने वाली विधा है। यहाँ पर क्षणों , इकाइयों और हिस्सों में बाँट कर जीवन को देखने के बजाय जीवन…
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Continue reading →: क्या समझ रखा है स्त्री को?
चुपचाप रहा करती है वो, सब कुछ सहा करती है वो, तुम्हारी शांति बनी रहे, दिन-रात घुला करती है वो, जो खोल दे अपने होंठ सिले, और फूट पड़े लावा पिघले, तुम हिंसक पशु बन जाते हो, क्या समझ रखा है स्त्री को ? धरती पर कदम रखा जब से,…
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Continue reading →: The Journey Begins
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