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Continue reading →: On Premchand
https://thewirehindi.com/133044/hindi-literature-life-and-works-of-premchand/
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Continue reading →: पगडंडियाँ
खुली सड़क के ठीक किनारे-सी लगी , घास-मिट्टी से ढकी, चलती जाती सफर की निरंतरता का आश्वासन देतीं कभी समानान्तर तो कभी दिशाहीन-सी ये पगडंडियाँ। सड़कें जिनका पिघलता है कोलतार सूरज की आंच में जिन पर जमी होती है भीड़ और होता है जहां दिन-रात कोलाहल, उनसे बचने…
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Continue reading →: On Girish Karnad
To read in Hindi, https://thewirehindi.com/127949/remembering-girish-karnad/ To read in Urdu, گریش کرناڈ: جس نے تخیل اور اسطوری کلامیہ سے عصری مسائل کو نمایاں کیا
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Continue reading →: एक टुकड़ा आसमान!
सफ़ेद फाहों- से बादलों पर तैरता धूप और छाँव के साथ भागता चमकता-सा ये आसमान। हवा के ज़ोर से उड़ते बादलों और धूप की रोशनी से नहाया नीले चादर-सा ये आसमान। अपने साये तले देता हर एक को कहने को अपना एक आशियाँ बूढ़े पिता-सा ये आसमान। नहीं ख़्वाहिश किसी…
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Continue reading →: बहस
बीच बहस में यूं ही जब लगे कि सब हैं खड़े एक तरफ हैं सबकी धारणायेँ एक और सबके सुर भीं हैं एक तब क्या बचते हैं खुद को अलग रख पाने के उपाय? शायद बहस का उत्तर एक और बहस, तर्क का समाधान एक और तर्क से या फिर…





