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Continue reading →: उलझनेंउलझनें तमाम उम्र की बस उस एक पल में सुलझती लगती हैं, जब महज़ ख्याल तुम्हारा वजूद में आता है। हाँ , गुज़रे हैं बरस कई, चंद लम्हों के इंतज़ार में बीत गए हैं क्षण अनगिनत, एक तुम्हारे खुमार में। पर ऐसा गुमान होता है मानो बरसों और क्षणों ने…
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Continue reading →: “नौकरी हमारे युग का सबसे बड़ा एडवेंचर है”नौकरी की तलाश कब ज़िंदगी का इतना ज़रूरी हिस्सा बन जाता है, पता ही नहीं चलता। जाने क्या सोच कर सुबह घर से निकल आयी। लगा कहीं ना कहीं ,कभी न कभी तो शुरुआत करनी होगी। कभी तो मुझे भी इन तमाम अनजान चेहरों के बीच उसी तत्परता के साथ…
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Continue reading →: मौसमें उधार दे दो….
हूँ जहां, वहाँ बहुत है ठंड। भेज दो अपने हिस्से की थोड़ी धूप । भेज दो वह चमकता बादल का सफ़ेद टुकड़ा जिस पर सूरज करता है किरणों की अठखेलियाँ , उस खेल का एक सिरा थमा दो। जिस ज़मीन के टुकड़े पर हम हैं, वहाँ सुबह हो या शाम…
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Continue reading →: Film Review: Gangubai KathiawadiRead my review: https://thewirehindi.com/209304/gangubai-kathiawadi-film-sex-workers-in-india/






