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Continue reading →: चलते जाना…….
कोई रास्ता दुनियां के इन तमाम अनजान रास्तों के बीच तुम तक ले जाता होगा। है एक वह दिशा भी, मेरे दसों ओर से फूटने वाली दिशाओं में जिसकी सीध में चलते जाना तुम्हारा पता कहलाता होगा। लंबी, वीरान या शायद खचाखच भरी ज़रूर होगी कोई सड़क, जिस पर चलते…
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Continue reading →: कहानी…कैसे कहूँ कि मुझे भी तुम्हारी तरह अच्छा लगता है चर्चाओं पर चर्चा करना, लोगों में घिरे रह कर बौद्धिक बातें करना। दुनियाँ की दिन-ब-दिन जर्जर होती हालत पर तरस खाना और कभी-कभी एकदम ही उबल पड़ना अपने आस पास की ग़रीबी पर, असमानता पर, तो कभी देश में…
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Continue reading →: ईद का चाँद…..छतों की कतार से दिखने वाले दूर क्षितिज पर तो कभी किसी सूनी खिड़की से झांक जाने वाले मुट्ठी भर आकाश में , तंग गलियों में सर उठाए पेड़ों की झुरमुट में तो कभी खुले चौक पर बने चबूतरे से दिख जाया करता है वो। कभी दुधमुंहे बच्चों की गीली…
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Continue reading →: प्रेम कैसा हो ?सूर्य के आकर्षण में फंसी पृथ्वी की तरह नहीं, जो बस उसकी तय की हुई परिधि पर घूमती रहे आदि से अंत तक, अनवरत, प्रश्नहीन। समंदर की अतल गहराइयों में वास करने वाली मछली की तरह भी नहीं जिसका सम्पूर्ण अस्तित्व जलमग्न हो और जल से बाहर निकलने की न…
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Continue reading →: पतंगें…..शाम की लालिमा लिए नीले आकाश में, कुछ पतंगें उड़ा करती थीं। ऊँचा थोड़ा और, थोड़ा और, वो डोर को ज़रा सा ढील दे कर हवा में थोड़ा और सरकती हुई पतंगें, हवा से मानो कोई होड़ किया करती थीं। अपनी खिड़की से उस खुली छत पर दुपहर ढलते ही…





