• यादों के बोल…..

    मेरी पीढ़ी के अधिकांश लोगों को हमारे बचपन के कुछ धुनों की याद बरबस ही होगी। स्मृतियाँ एक ऐसे निम्न मध्यमवर्गीय बचपन की जहां एक छोटे से टी. वी सेट पर एकता कपूर (प्रायः) के धारावाहिक सप्ताह के पाँच दिन आया करते थे और हम सब चाहे किसी भी उम्र…

    Continue reading →: यादों के बोल…..
  • अपने पास….

    दूर…….बहुत…… दूर हूँ तुम्हारी व्यस्त शोहरतों की दुनिया से और तुमसे। एक कांच का पहाड़ जिसके पार तुम्हारा संसार दिखता भर है पर जिसे भेद कर तुम तक आ सकूँ छू कर महसूस करूँ, यह संभव नहीं। मेरी चुपचाप सूनी बस्ती में दिन में भी सन्नाटा है। यहाँ मैं हूँ…

    Continue reading →: अपने पास….
  • फ़ितरत…

    फ़ितरत…

    ज़िंदगी उम्मीदें मेरीतुझसे ख़त्म नहीं होतीं। बेसब्र मेरी रातों को सुबहोंकी ख्वाहिश,तपती मेरी धरतीको बूँदों की ख्वाहिश,सितारों को हौले से टाँक दूँमैं जिनमेंआसमाँ की मेरी वोतलाश ख़त्म नहीं होती! हसरतें बेशुमार दिलकी अधूरी,सफ़र में ही बीती मंज़िलोंकी राह पूरी।सपनों से हर पल कुछ बढ़तीहुई दूरीछूटा ज़िंदगी से हर नाता वो…

    Continue reading →: फ़ितरत…
  • हासिल

    भला ही है यह समझते रहना कि बेरुख़ी  का तुम्हारी मुझे पता नहीं चला। कि न ग़ौर किया हो तुम्हारा  यूँ दिन-ब-दिन आँखों से  ही नहीं पर  मेरे ख़यालों से भी ओझल होते जाना।  कि तुम्हारी चुप्पियों का मुझे अंदाज़ा न हुआ हो  कि तुम्हारी उपेक्षा तुम्हारी मुझसे उदासीनता का …

    Continue reading →: हासिल
  • ढूंढ लेना…..

    मिल जाना मुझे हर बार यूं ही अनगिनत जन्मों के चक्र में जीवन मृत्यु के सीमांतों से निकल व्यक्तियों की भीड़ में यूं ही टकरा जाना फिर से एक बार हर बार।   इसी एक आश्वासन पर तुमसे विदा लेती रही हूँ कि चाहे कुछ भी हो जाए दुनिया कितनी…

    Continue reading →: ढूंढ लेना…..

Dear Readers

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

तही ज़िंदगी से नहीं ये फ़ज़ाएँ

यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा

तिरे सामने आसमाँ और भी हैं”

Let’s connect

Design a site like this with WordPress.com
Get started