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Continue reading →: फाँसजो कभी पा जाओ सुकून तो कहना। झलक भर से उसकी क्या पता उफनते हुए इस मन को भी थोड़ी ठंडक ही मिल जाए प्यासे इन होंठों पर तरावट फैल जाये, जो तुम पा जाओ सुकून तो कहना! थोड़ी ख़ुद से हो फ़ुर्सत कभी तो कहना। झाँक लेना यूं ही…
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Continue reading →: यादों के बोल…..मेरी पीढ़ी के अधिकांश लोगों को हमारे बचपन के कुछ धुनों की याद बरबस ही होगी। स्मृतियाँ एक ऐसे निम्न मध्यमवर्गीय बचपन की जहां एक छोटे से टी. वी सेट पर एकता कपूर (प्रायः) के धारावाहिक सप्ताह के पाँच दिन आया करते थे और हम सब चाहे किसी भी उम्र…
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Continue reading →: अपने पास….दूर…….बहुत…… दूर हूँ तुम्हारी व्यस्त शोहरतों की दुनिया से और तुमसे। एक कांच का पहाड़ जिसके पार तुम्हारा संसार दिखता भर है पर जिसे भेद कर तुम तक आ सकूँ छू कर महसूस करूँ, यह संभव नहीं। मेरी चुपचाप सूनी बस्ती में दिन में भी सन्नाटा है। यहाँ मैं हूँ…
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Continue reading →: फ़ितरत…ज़िंदगी उम्मीदें मेरीतुझसे ख़त्म नहीं होतीं। बेसब्र मेरी रातों को सुबहोंकी ख्वाहिश,तपती मेरी धरतीको बूँदों की ख्वाहिश,सितारों को हौले से टाँक दूँमैं जिनमेंआसमाँ की मेरी वोतलाश ख़त्म नहीं होती! हसरतें बेशुमार दिलकी अधूरी,सफ़र में ही बीती मंज़िलोंकी राह पूरी।सपनों से हर पल कुछ बढ़तीहुई दूरीछूटा ज़िंदगी से हर नाता वो…
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Continue reading →: हासिल
भला ही है यह समझते रहना कि बेरुख़ी का तुम्हारी मुझे पता नहीं चला। कि न ग़ौर किया हो तुम्हारा यूँ दिन-ब-दिन आँखों से ही नहीं पर मेरे ख़यालों से भी ओझल होते जाना। कि तुम्हारी चुप्पियों का मुझे अंदाज़ा न हुआ हो कि तुम्हारी उपेक्षा तुम्हारी मुझसे उदासीनता का …





