ज़िंदगी उम्मीदें मेरी
तुझसे ख़त्म नहीं होतीं।
बेसब्र मेरी रातों को सुबहों
की ख्वाहिश,
तपती मेरी धरती
को बूँदों की ख्वाहिश,
सितारों को हौले से टाँक दूँ
मैं जिनमें
आसमाँ की मेरी वो
तलाश ख़त्म नहीं होती!
हसरतें बेशुमार दिल
की अधूरी,
सफ़र में ही बीती मंज़िलों
की राह पूरी।
सपनों से हर पल कुछ बढ़ती
हुई दूरी
छूटा ज़िंदगी से हर नाता वो ज़रूरी
पर दुआओं की मेरी
चाहत ख़त्म नहीं होती।
चोटों से घायल होती
सारी अच्छाई,
रूहों पर ग़म की धुंधली
परछाईं,
कहीं कुचली पड़ी कोई कोशिश
तो कभी हारे हुए मन की लम्बी लड़ाई
पर यक़ीनों की मेरी
फ़ितरत ख़त्म नहीं होती।
कभी करता निराश कोई
बड़ा अपना,
कभी यूँ ही बुना अनजान
कोई सपना।
ख़ुद को चुका कर न पाने
की कोई आशा,
हो रोज़ मिलती भली लाखों
हताशा,
पर तुझसे मेरी नादान
मुहब्बत कभी ख़त्म नहीं होती।
ज़िंदगी उम्मीदें मेरी
तुझसे ख़त्म नहीं होतीं।







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