
कोई रास्ता दुनियां के इन तमाम
अनजान रास्तों के बीच
तुम तक ले जाता होगा।
है एक वह दिशा भी, मेरे
दसों ओर से फूटने वाली दिशाओं में
जिसकी सीध में चलते जाना
तुम्हारा पता कहलाता होगा।
लंबी, वीरान या शायद खचाखच भरी
ज़रूर होगी कोई सड़क,
जिस पर चलते हुए कभी न कभी
तुम्हारा शहर आता होगा।
कोई बेहद संकरी गली, मटमैली
बरसात में आँखों से न दीख पड़ने वाली
तुम्हारे घर के ठीक सामने रुकती होगी।
एकदम नि:शब्द बहने वाली कोई नदी
जो किसी गुमनाम पहाड़ से
एक दुपहर निकलती
तुम्हारे गाँव को अपने दो छोरों में समेट आबाद करती होगी।
कुछ बेनाम परिंदे
मुंह अंधेरे आकाश के सुनसान सफर को निकले
शाम को तुम्हारी छत से होकर
गुज़रते होंगे।
मौसमों वाली गोलघड़ी तुम्हारे
घर की चौखटों पर नियम से
उड़ाती होगी धूप , लाती होगी कोहरे या
झमाझम गिराती होगी पानी।
बादलों का कोई लंबा……..सा टुकड़ा
तुम्हारे आसमान पर भी छाँव लाने
कुछ पलों के
के लिए ठहरता होगा।
इन सबको, इन सब……….को
बेवजह अनायास निरुद्देश्य
पता होगा कि
इस धरती
पर आखिर तुम्हारा पता कहाँ है
और यूं ही किसी दिन
तुमसे मिलने के लिए किस
रास्ते, दिशा, सड़क या गली
पर नदियों, परिंदों, मौसमों और बादलों की पतवार
थामे चलते जाना है
बस…….चलते……जाना है।






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