भीड़

भीड़

1

भीड़ व्यक्तियों का भी है,

बातों का भी।

जिस तरह क्षणों से मिल कर एक युग और

लहरों से मिल एक नदी बनती है

उसी तरह,

लोगों से एक भीड़ बनती है।

2

भीड़ की आँखें नहीं होतीं,

और न

होता है महसूस करने को हृदय।

होता है तो सिर्फ एक ठोस नुकीला दिमाग,

जो सिर्फ अपने लाभ की प्रेरणा से,

तो कभी

अपने गुणगान की आशा से,

और कभी-कभी तो

दरकिनार कर दिये जाने के भय से ही

बना रहता है हिस्सा, भीड़ का चुपचाप।

3

कुछ शर्तें हैं,

इस भीड़ में शामिल होने की।

हर किसी को सदस्यता नहीं मिलती ।

कुछ आधारभूत गुण ज़रूरी हैं ,

कुछ पूर्व-निर्धारित कानून,

जिन्हें अपने गले उतार कर ही आप हो पाएंगे भीड़ के

सर्वश्रेष्ठ सम्मानित योग्य सदस्य।

4

मसलन,

मिलाना होगा सुर में सुर , गाना होगा एक ही राग

जो कहलाता है  ‘भीड़ राग’

बड़े अच्छे गवैया बस वो ही, जो सबसे ज़्यादा सुर मिलायेंगे ,

और बस गाना भर ही नहीं,

देनी होगी बात-बात पे दाद

जो बड़े गायक नहीं कम-स-कम मुंह से तो निकालें ही

वाह-वाह।

5

सिद्ध करनी अपनी श्रेष्ठता भीड़ के बीचों-बीच

भला यह भी तो है एक विशेष नियम।

ताकि अंधी भीड़ में भी कुछ चुन लिए जाये

‘लीडर’ निर्विवाद ,

जो दे सके हांक सबको, जो ‘सुझा’ सके एक ही संकरा रास्ता

जिस पर उसके अनुयायी चलते रहें बारंबार

बस करते हुए वाह- वाह।

6

भीड़ का सबसे जरूरी वह हिस्सा जहां पर

मिलानी होगी आपको अपनी अस्मिता,

चलें जाने दें कठिन शब्द है,

तो हाँ….

भीड़….. का….. सबसे….. जरूरी…… वह…… हिस्सा….. जहां…… पर…….

मिटा देनी होगी अपनी पहचान ,

अपने निज का स्वभाव।

पहने रहना होगा एक केंचुला, एक खोल

जिसे पहन कर लग सकें बांकियों की तरह।

ताकि कोई आपको चलती हुई भीड़ में न कह दे,

गज़ब,

कि, भला, कैसे आप रखते हैं थोड़े अलग- से विचार

कि, आप वो तो नहीं

जो दिखाई देते हैं इस भीड़ के साथ।

7

बहरहाल, कुछ अपने फायदे भी है भीड़ के इन

कठोर नियमों के साथ।   

जैसे, बिना किसी मानसिक श्रम के

मिल जाया करेगी झूठी दाद।

जिसे जीवन की वास्तविकता

मान कर चौड़ी कर लेंगे छाती

और उसी भीड़ में, फूले हुए सीने से

घूमते रहेंगे आप।

8

हो जाया करेगा स्वतः ही आपकी उपलब्धियों का प्रचार,

बिना किसी पत्रिका, बिना किसी अख़बार।

और सस्ती-सी इस लोकप्रियता के

बस आप ही होंगे हकदार।

क्या कहते हैं ?

हैं न नुस्खा ज़ोरदार!

9

और भी हैं नफे, रहने में इस भीड़ के साथ।

कोई नहीं करेगा आपसे सवाल, न…………

कोई नहीं उठाएगा आप पर उंगली,

अरे आप तो सदस्य श्रेष्ठ ठहरे इस भीड़ के

सो ,

आपकी निहायत अदना -सी ज़िंदगी का भी

मनाया जाएगा जश्न मज़ेदार।

10

भीड़ का हिस्सा बने रहने वालों की ज़िंदगियाँ भी

होती हैं हाशिये पर खड़े रहने वालों से

ज़्यादा उमरदराज़।

लंबा जिएंगे आप , इसकी गारंटी पूरी है

अगर बने हुए हैं आप,  

लगातार भीड़ के साथ।

कारण यही कि, दिलों के आज भी नहीं होते इलाज

पर भीड़ के दिमागों के हकीम-डॉक्टरों से

भरे हुए हैं बाज़ार।

सो, घबराए बिलकुल भी नहीं भीड़ के सदस्य श्रेष्ठ

कर दिया जाएगा फ़ौरी इलाज ।

11

तो ?

क्या कहते हैं ?

भीड़ के सम्पूर्ण रूप को आप

क्या नहीं करना चाहेंगे आत्मसात ?

जहां हो इतने सारे फायदे, क्या नहीं लेंगे सदस्यता आप ?

थोड़े समझौते अगर कर लें तो

मान कर चलें जनाब,

ज़िंदगी का लुत्फ़, अरे, सच में , हाँ…..हाँ…..

हर गफ़्फ़े में उठाएंगे आप।

हाँ ……..बस करने होंगे थोड़े ही से तो, समझौते,

जिसके हो जाएंगे आदी आप,

प्रयत्न करने से बारंबार।

तो, सलाह लें ……

और तत्काल निकल पड़िए भीड़ के साथ

खुल्लम खुल्ला और बेबाक।

वरना भीड़ लगा सकती हैं आपकी अयोग्यता पर

प्रश्न चिह्न हज़ार,

और क्या पता दे सकती हो आपको पागल भी करार।

Leave a comment

Dear Readers

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

तही ज़िंदगी से नहीं ये फ़ज़ाएँ

यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा

तिरे सामने आसमाँ और भी हैं”

Let’s connect

Design a site like this with WordPress.com
Get started