सफ़ेद फाहों- से बादलों पर तैरता
धूप और छाँव के साथ भागता
चमकता-सा ये आसमान।
हवा के ज़ोर से उड़ते बादलों
और धूप की रोशनी से नहाया
नीले चादर-सा ये आसमान।
अपने साये तले देता हर एक को
कहने को अपना एक आशियाँ
बूढ़े पिता-सा ये आसमान।
नहीं ख़्वाहिश किसी की भी कि
मिल जाए पूरे का पूरा ये जहाँ
बस हिस्से में एक टुकड़ा-आसमान।






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